साधारण एसी की तुलना में इन्वर्टर एसी या स्मार्ट एसी कैसे काम करता है?

सबसे पहले तो इन्वर्टर एसी के बारे में जो गलतफ़हमी आमतौर पर सब लोगों को होती है, उसे समझ लें। ‘इन्वर्टर‘ शब्द से ही लोगों को लगता है कि यह एसी बिजली के जाने के बावजूद चलेगा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसका सिर्फ इतना ही मतलब है कि जहाँ साधारण (नॉन-इन्वर्टर) एसी का कम्प्रेसर फिक्स्ड (‘On’ या ‘Off’ के सिद्धांत) स्पीड पर कूलिंग करता है, इन्वर्टर एसी में यह वेरीएबल (‘Fast’ या ’Slow’) स्पीड से कूलिंग करता है। 
 
1. कंप्रेसर पूरी तरह बंद नहीं होता
फिक्स्ड एसी में जब कमरा ठंडा हो जाता है, तो कंप्रेसर बंद हो जाता है और फिर दोबारा शुरू होने पर बहुत ज्यादा बिजली (Startup Current) लेता है। वहीं दूसरी ओर इन्वर्टर एसी में, जैसे ही कमरा आपके सेट किए हुए तापमान (जैसे 24°C) के करीब पहुँचता है, कंप्रेसर बंद होने के बजाय अपनी रफ्तार धीमी कर लेता है।
 
2. स्पीड कैसे कंट्रोल होती है?
इन्वर्टर एसी में एक विशेष सर्किट होता है जो कम्प्रेसर की रफ़्तार को बदल सकता है। तो शुरुआत में, कंप्रेसर बहुत तेज चलता है ताकि कमरा जल्दी ठंडा हो, और तापमान के लक्ष्य पर आने पर, यह अपनी स्पीड घटाकर उतनी ही कूलिंग करता है जितनी कमरे का तापमान बनाए रखने के लिए जरूरी है।
 
संक्षेप में: इन्वर्टर एसी में तापमान का नंबर केवल ‘कट-ऑफ’ पॉइंट नहीं है, बल्कि वह कंप्रेसर की रफ्तार को कंट्रोल करने वाला सिग्नल है।
 
इन्वर्टर एसी के फायदे?
बिजली की बचत: क्योंकि इसे बार-बार ‘Start’ होने के लिए झटका नहीं लेना पड़ता, यह 30% से 50% तक बिजली बचा सकता है।
 
सटीक तापमान: फिक्स्ड एसी में तापमान 22 से 26 के बीच कम-ज़्यादा होता रहता है, लेकिन इन्वर्टर एसी उसे 24 पर ही स्थिर रखता है।
 
कम शोर: चूंकि कंप्रेसर हमेशा पूरी ताकत से नहीं चलता, इसलिए यह बहुत कम आवाज करता है।
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